प्रत्येक घराणे की एक कुलदेवी/कुलदैवता होता है। अधिकांश घरों में विवाह, उत्सव, व्रत, मंगलकार्य आदि बड़े कार्यक्रमों मे कुलदेवी के दर्शन करने जाना एक महत्वपूर्ण भाग होता है। कुलदेवी या कुलदेवता किसी भी परिवार के मुख्य देवी या देवता के रूप में पूजे जाते हैं और ये उस परिवार के मुख्य रक्षक भी होते हैं | किसी भी विशेष कार्य को करने से पहले कुलदेवी या कुलदेवता को पूजने की मान्यता है।आज के समय में बहुत से परिवारों को उनके कुलदेवी या कुलदेवता का पता नहीं
होता है अतः ऐसे में चिंता की बात नहीं है| कुलदेवी स्त्रोत्रम का पाठ करकेऔर सुनके हम अपने कुलदेवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
स्तोत्रं : श्री कुलदेवी स्तोत्रं
नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी।
कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।
वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।
वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।
आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।
विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।
त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।
महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।
कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।
चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां “कुल गौरवाम्”।।
त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:!
त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।
कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत।
तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।
कुलदेवी स्तोत्रमिदम सुपुण्यं ललितं तथा ।
अर्पयामी भवत भक्त्या त्राहिमाम् शिव गेहिनी।।
कुलदेवी शिवाय माता की जयप्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥१॥
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
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कुलदैवी या कुलदेवता का क्या अर्थ है
कुलदेवता’ यह शब्द ‘कुल’ और ‘देवता’ इन दो शब्दों से मिलकर बना है। कुलदेवी वह देवी होती हैं जो किसी विशेष परिवार, खानदान या गोत्र की संरक्षक (रक्षक) मानी जाती हैं, इन्हें वंश की आदि देवी कहा जाता है, और परिवार के शुभ कार्यों, जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश आदि कार्यों से पहले इनकी पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है।कुलदेवता जब पुरुष देवता होते हैं, तब उसे ‘कुलदेव’और जब वह स्त्री देवता होती हैं, तब उसे ‘कुलदेवी’ कहकर संबोधित किया जाता है।
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कुलदेवी/कुलदैवता का महत्व क्या है?
श्रेष्ठ ईश्वरीय कृपा के लिए हम इस देवता की उपासना करते हैं, इसी देवता ने इस कुल में ईश्वर ने हमें जन्म दिया, इसलिए हमारे कुलदेवी/कुलदैवता का जप प्रतिदिन जैसा वक्त मिले वैसा और जितना-जितना अर्थात निरंतर करना चाहिए। मान लीजिए कुलदेवी आई सप्तशृंगी हैं, तो “श्री सप्तशृंगीदेव्यै नमः” या “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिकेशरण्ये त्रयंबके गौरी सप्तशृंगी नमोऽस्तुते” इस प्रकार नामजप करना चाहिए।सुख-समृद्धि: इनकी पूजा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है.संकट निवारण: ऐसा माना जाता है कि कुलदेवी को प्रसन्न रखने से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं. शुभ कार्यों का आरंभ: कोई भी नया या शुभ काम शुरू करने से पहले कुलदेवी-देवता का स्मरण और पूजा अनिवार्य मानी जाती है
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हमारी कुलदेवी/कुलदैवता कहाँ है
परिवार के बुजुर्ग: अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों या पुरोहित से पूछकर आप अपनी कुलदेवी के बारे में जान सकते हैं, या जिनकी पूजा आपके पूर्वज करते थे या जो आपके मूल स्थान (पैतृक गांव) से जुड़ी हों. गोत्र के माध्यम से: हर गोत्र की अपनी एक कुलदेवी या देवता होते हैं। कुलदेवता का पता न हो, तो ‘श्री कुलदेवतायै नमः’ इस प्रकार नामजप करना चाहिए। यह नामजप ईमानदारी और पूर्ण श्रदा भाव से करने पर कुलदेवी/कुलदैवता का नाम बताने वाला कोई न कोई या कोई मार्ग अवश्य मिल जाता है।
